जगदलपुर, 06 अक्टूबर 2026। बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुम्हली के किसान कमलोचन नाग के लिए मनरेगा की डबरी खुशहाली और आत्मनिर्भरता का जरिया बन गई है। करीब 5 एकड़ कृषि भूमि होने के बावजूद सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से वे पहले केवल बारिश के मौसम में ही एक फसल ले पाते थे। बाकी समय खेत का बड़ा हिस्सा बंजर पड़ा रहता था।
कमलोचन की जिंदगी में बदलाव तब आया, जब ग्राम पंचायत में उनकी मुलाकात मनरेगा के तकनीकी सहायक से हुई। उन्हें निजी खेत में डबरी निर्माण, वर्षाजल संचयन, सिंचाई और मछलीपालन के फायदे के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने परिवार से चर्चा कर डबरी निर्माण के लिए ग्राम पंचायत में आवेदन किया।
जिला पंचायत से प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद ग्राम पंचायत कुम्हली में डबरी का निर्माण शुरू कराया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के तहत स्वीकृत 1 लाख 98 हजार रुपए की राशि और 1 लाख 66 हजार रुपए के व्यय से यह कार्य पूरा हुआ। करीब 40 दिनों तक चले निर्माण कार्य में कमलोचन के परिवार के साथ गांव के अन्य मनरेगा श्रमिकों को भी रोजगार मिला। खेत में करीब 30 मीटर लंबी, 30 मीटर चौड़ी और 3 मीटर गहरी डबरी तैयार हुई।
बारिश के दौरान डबरी पानी से भर गई। इसके बाद कमलोचन ने उसमें मछली के बीज डाले और डबरी के पानी का उपयोग खेती में भी करने लगे। खेत में नमी बनी रहने से धान की पैदावार बेहतर हुई। धान की कटाई के बाद डबरी के पानी से उन्होंने अपनी बाड़ी की सिंचाई की और मेड़ों पर केला, मटर, बैंगन, धनिया और मिर्ची सहित विभिन्न फसलें लगाईं।
सब्जियों से परिवार की जरूरतें पूरी होने लगीं और अतिरिक्त उत्पादन को गांव में बेचकर उन्हें नकद आमदनी भी होने लगी। वहीं डबरी में पाली गई मछलियां परिवार के पोषण का साधन बनीं और अतिरिक्त मछलियों की बिक्री से आमदनी में भी इजाफा हुआ।
कमलोचन का कहना है कि पानी के अभाव में पहले खेती सीमित थी, लेकिन डबरी बनने के बाद उन्हें खेती, सब्जी उत्पादन और मछलीपालन के जरिए आगे बढ़ने का नया अवसर मिला है। आज यह डबरी उनके लिए सिर्फ पानी जमा करने का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बेहतर आजीविका का आधार बन चुकी है।