जगदलपुर, 29 सितंबर 2026। बस्तर में भीषण बाढ़ के बाद अब प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत कार्यों पर फोकस बढ़ा दिया है। मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में कलेक्टर आकाश छिकारा की अध्यक्षता में हुई समय-सीमा की बैठक में राहत शिविरों, क्षति सर्वेक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल और बिजली व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि बाढ़ के दौरान रेस्क्यू के बाद अब सबसे जरूरी काम प्रभावितों को राहत पहुंचाना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप मकान, फसल, पशु क्षति और जनहानि का तेजी से सर्वेक्षण कर प्रकरण तैयार करने को कहा, ताकि प्रभावितों को समय पर मुआवजा मिल सके। दो दिन से अधिक जलभराव के कारण कपड़े और बर्तनों को हुए नुकसान के लिए निर्धारित राहत राशि स्वीकृत करने तथा क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए निःशुल्क बांस-बल्ली उपलब्ध कराने के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश
कलेक्टर ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए। जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, पीलिया, टायफाइड, मलेरिया और चर्म रोग जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य दलों को घर-घर पहुंचने, क्लोरीन की गोलियां वितरित करने और पानी उबालकर पीने के लिए लोगों को जागरूक करने को कहा गया।
पीएचई विभाग को क्षतिग्रस्त हैंडपंप और पाइपलाइनों की तत्काल मरम्मत कर शुद्ध एवं क्लोरीनेटेड पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। वहीं, जलस्तर सामान्य हो चुके क्षेत्रों में सब-स्टेशन और ट्रांसफार्मरों की जांच कर बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए विद्युत विभाग को कहा गया।
बैठक में आगामी 7 और 8 अक्टूबर को रायपुर में होने वाले राज्य स्तरीय रोजगार मेले के जिले में व्यापक प्रचार-प्रसार, ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत मशाल रैली और रंगोली कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। राजस्व विभाग को डिजिटल क्रॉप सर्वे और ई-केवाईसी का लंबित कार्य 10 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा पीएम-सूर्यघर योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को सब्सिडी का लाभ दिलाने, सांसद और विधायक निधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियां जारी करने तथा मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के कन्वर्जेंस से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने ब्लॉक और तहसील स्तर के कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली के साथ कर्मचारियों की शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक एवं ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ राहत, पुनर्वास और जनहित से जुड़े कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने को कहा।