वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाया गया फैसला, चौथे दोषी को मृत्यु तक आजीवन कारावास
रायपुर, 9 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद मुख्य दोषी कुलदीप साहू को रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मृत्युदंड और चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मृत्युदंड से संबंधित प्रक्रिया के लिए रायपुर सेंट्रल जेल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण यह कदम उठाया जा रहा है।
जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के मुताबिक, कुलदीप साहू को अंबिकापुर केंद्रीय जेल से रायपुर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी। फिलहाल जेल में उसकी सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाया गया फैसला
अदालत ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को चारों दोषियों को सजा सुनाई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाए जाने के दौरान मुख्य दोषी कुलदीप साहू डरा हुआ नजर आया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले एक अन्य मामले में 10 साल की सजा मिलने के बाद वह अदालत से बाहर निकलते समय मुस्कुराता दिखाई दिया था। हालांकि, इस मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के दौरान उसकी प्रतिक्रिया अलग रही।
13 अक्टूबर 2024 को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। सूरजपुर थाने में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। वारदात से पहले महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने की बात जांच में सामने आई थी। इसके बाद मां-बेटी के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।
मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार किए गए थे, जबकि उसकी मां पर 33 वार किए गए थे। जांच में महिला और बच्ची के साथ यौन अपराध से जुड़े आरोपों की पुष्टि होने की बात भी सामने आई।
फिंगरप्रिंट और डीएनए जांच बने अहम साक्ष्य
पुलिस जांच में आरोपियों के फिंगरप्रिंट, कपड़ों पर मिले खून के नमूने और डीएनए जांच को अहम साक्ष्य माना गया। इन्हीं साक्ष्यों सहित मामले में प्रस्तुत अन्य तथ्यों के आधार पर अदालत में सुनवाई हुई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू समेत चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद 8 अक्टूबर को सजा का ऐलान किया गया। अदालत ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और आर्यन विश्वकर्मा को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले में सजा सुनाए जाने के बाद अब दोषियों को जेल में स्थानांतरित करने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।