मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 20 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के घुटरा गांव में रहने वाले एक मजदूर का नाम ‘राष्ट्रपति’ होने का मामला अब राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गया है। इस मामले में संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों को व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है।
माता-पिता ने रखा था नाम, दस्तावेजों में भी दर्ज
घुटरा गांव के निवासी राष्ट्रपति पेशे से मजदूर हैं और मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। गांव में लोग उन्हें आमतौर पर ‘राजपति’ कहकर बुलाते हैं, लेकिन स्कूल की मार्कशीट और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेजों में उनका नाम ‘राष्ट्रपति’ दर्ज है। जानकारी के मुताबिक, प्राथमिक स्कूल घुटरा के दाखिला रजिस्टर में 14 जुलाई 1988 को उनका नाम इसी रूप में दर्ज किया गया था।
अपने नाम को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह नाम अटपटा लगता है, क्योंकि वे पेशे से मजदूर हैं और उनका नाम काफी बड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उनका नाम राष्ट्रपति रखा था।
कांग्रेस नेता ने उठाई स्पष्ट कानून बनाने की मांग
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने इस मामले पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। उन्होंने मांग की है कि ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे शब्दों को व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल करने के संबंध में स्पष्ट नीति और कानूनी प्रावधान बनाए जाएं।
उनका कहना है कि संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत इस्तेमाल को लेकर नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में असमंजस की स्थिति न बने।
राष्ट्रपति सचिवालय ने संबंधित विभागों को भेजा पत्र
इस मामले में राष्ट्रपति सचिवालय ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित केंद्रीय विभागों को पत्र भेजा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका को 17 सितंबर 2026 को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव और विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के पास भेजा गया।
पत्र में संबंधित अधिकारियों से मामले पर ध्यान देने और याचिका पर की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को देने की बात कही गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इस मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी सामने आई है।
अब यह मामला केवल एक व्यक्ति के नाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल को लेकर नियम तय करने की मांग के कारण चर्चा में है।