बिलासपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती-2026 को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट देने के प्रावधान पर सुनवाई करते हुए भर्ती एजेंसी को न्यायालय के पूर्व फैसलों और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अधिसूचना का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन और आवेदन पोर्टल में छूट का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने पर उठे सवाल
मस्तूरी, जिला बिलासपुर की निवासी पुष्पा देवी ने 28 जुलाई 2026 को जारी सहायक शिक्षक भर्ती के विज्ञापन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट देने का प्रावधान भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट नहीं किया गया है। ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पर भी इस छूट का लाभ लेने की व्यवस्था नहीं होने से अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने 10 फरवरी 2023 को रिट अपील और संबंधित मामलों में दिए गए फैसले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट का पात्र माना था। इसके अलावा, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना में भी इस संबंध में प्रावधान है।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वर्ष 2019 की भर्ती के संदर्भ में राज्य सरकार ने 2 सितंबर 2025 के आदेश से ऐसी छूट लागू की थी, लेकिन वर्ष 2026 की भर्ती के विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
शासन ने कहा- याचिका समय से पहले
राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन में अभ्यर्थियों की पात्रता निर्धारित करते समय न्यायालय के फैसलों और संबंधित अधिसूचनाओं का पालन करने की बात स्पष्ट है। ऐसे में यह मान लेना उचित नहीं होगा कि भर्ती एजेंसी नियमों का पालन नहीं करेगी। शासन ने याचिका को समय से पहले दायर बताया।
नियमों का उल्लंघन हुआ तो फिर हाई कोर्ट जा सकेंगी याचिकाकर्ता
न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की पीठ ने कहा कि भर्ती एजेंसी के लिए हाई कोर्ट के पूर्व फैसलों और एनसीटीई की अधिसूचना का पालन करना अनिवार्य है। हालांकि, फिलहाल याचिकाकर्ता के अधिकारों के वास्तविक उल्लंघन का मामला सामने नहीं आने के कारण कोर्ट ने याचिका को समयपूर्व मानते हुए निराकृत कर दिया।
हाई कोर्ट ने पुष्पा देवी को यह स्वतंत्रता भी दी है कि यदि भर्ती एजेंसी निर्धारित नियमों और पूर्व फैसलों के अनुरूप कार्रवाई नहीं करती तथा इससे उनके अधिकार प्रभावित होते हैं, तो वे दोबारा हाई कोर्ट का रुख कर सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात: हाई कोर्ट ने फिलहाल पांच प्रतिशत छूट को लेकर भर्ती प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है, बल्कि संबंधित नियमों और अधिसूचना का पालन अनिवार्य बताया है।